
- ‘वाराणसी से रिपोर्ट’
“श्याम सुन्दर जायसवाल”
महापर्व छठः लोक परंपरा और श्रद्धा से सूर्य को अर्घ्य, सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूर्व गंगा तट पर भक्ति, अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था का अद्भुत संगम
वाराणसी- में मंगलवार की सुबह महापर्व छठ का दृश्य आस्था और भक्ति से ओतप्रोत दिखाई दिया। लोक परंपरा और श्रद्धा से जुड़ा यह पर्व पूर्वांचल में सूर्य उपासना का प्रतीक माना जाता है। व्रती महिलाओं ने सिर पर पूजा सामग्री की डलिया रखकर घाटों की ओर रुख किया। गंगा तट पर भक्तों की भीड़ उमड़ी, हर ओर छठ मइया के गीत गूंजते रहे।
सूर्योदय के समय श्रद्धालुओं ने उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान घाटों पर भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। अर्घ्य के बाद लोगों ने एक-दूसरे को छठ महापर्व की शुभकामनाएं दीं।
नगर के सभी प्रमुख घाटों — अस्सी, दशाश्वमेध, राजघाट और वरुणा तट — पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। महिलाएं पीले वस्त्रों में सज-धज कर पूजा की थाली लेकर पहुंचीं। सूर्योपासना के साथ छठी मैया के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गईं। घाटों पर सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और होमगार्ड तैनात रहे। नगर निगम की टीमों ने घाटों की साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने का कार्य लगातार जारी रखा
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार के कल्याण, समृद्धि और सुखमय जीवन की प्रार्थना की। वाराणसी का घाट क्षेत्र भक्ति, अनुशासन, स्वच्छता और सुरक्षा का अद्भुत प्रतीक बना रहा।